हाय एवरीवन आज मैं आपको बताने वाला हूं एक मेडिसिन के बारे में वह मेडिसिन का नाम है पुष्यानुग चूर्ण यह एक आयुर्वेद की बहुत ज्यादा फेमस तथा निरापद मेडिसिन है और आपने इसके बारे में जरूर सुना होगा। इसका प्रयोग सदियों से लोग विदाउट डॉक्टर कंसल्टेशन में करते आ रहे हैं और निश्चित रूप से इसका फायदा ही होता है। तो आज मैं आपको इस मेडिसिन के बारे में डिटेल में बताऊंगा कि किस तरीके से आपको इस मेडिसिन का प्रयोग करना है।
चलिए शुरू करते हैं पुष्यानुग मेडिसिन के बारे में, पुष्यानुग मेडिसन यह आयुर्वेद की सबसे पुरानी मेडिसिन है। इसका जो फर्स्ट रेफरेंस मिलता है, वह आचार्य चरक ने दे रखा है। आचार्य चरक ने अपनी जो संहिता लिखी थी चरक संहिता उसमें उन्होंने योनि व्यापत यानी कि जो फीमेल के डिसऑर्डर है, उसने इस मेडिसिन का नाम लिखा है और इसे कैसे बनाना है उसके बारे में डिटेल में बताया हुआ है।

पुष्यानुग चूर्ण के घटक (Pushyanug churna ke ghatak)
इसके अंदर बहुत सारी औषधिया है जैसे पाठा, जामुन की गुठली, आम की गुठली, पाषाणभेद,रसौत, मोचरस, मंजिस्ट, कुटज की छाल, केसर, अतीस, कच्चे बेल की गूदी, नागरमोथा, लोध, गेरू, सोन पाठा, मजीठ, शॉट, मुनक्का, लाल चंदन, कायफूल, इंद्रा जो, अनंत मूल, धाय के फूल, मुलेठी अर्जुन की छाल इतने सारे द्रव्य होते हैं। इन सबको मिलाकर समान मात्रा में रखा जाता है। उसका बारीक पाउडर बनाया जाता है जिसको पुष्यानुग चूर्ण बोलते हैं।
पुष्यानुग चूर्ण की सेवन विधि (Pushyanug churna ki sevan vidhi)
अब इसका सेवन कैसे करना हैं, पुष्यानुग के बारे में ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि इसको चावल के पानी के साथ लेना है, लेकिन इसको हमेशा शहद के साथ लिया जाता है। आप पुष्यानुग चूर्ण लीजिए आधी चम्मच की मात्रा में अगर आप आधी चम्मच से ज्यादा भी ले लेंगे तो कोई साइड इफेक्ट नहीं आएगा। एक कटोरी में आधी चम्मच पुष्यानुग चूर्ण को ले लें फिर उसमे आपको उतनी ही मात्रा में शहद डालना है, थोड़ा सा घी डालना है। इसको अच्छे मिलाएं तो पतला पतला पेस्ट बन जाएगा। इसको आपको लेना है ऊपर से आपको चावल का पानी पीना है।
चावल का पानी, अब चावल पानी कैसे बनाते हैं। चावल को बॉईल नहीं करना है। आप क्या करें एक गिलास में एक चम्मच चावल को छोड़ दीजिए। जब आप उसे रात भर कम से कम 3 से 4 घंटे अगर रख सके तो पूरी रात यानी कि 12 घंटे आप उसको पानी में रखा रहने दीजिए जब 12 घंटे में पानी में चावल रखे रहेंगे तो चावल पूरी तरीके से गल जाएंगे बिना उबाले भी गल जाएंगे। फिर अगले दिन आप उसको अपने हाथ से अच्छे से मसल लीजिये जिससे जितना भी उसका मंड होता है, जितना भी उसका स्टार्च होता है। वह पानी में आ जाए उसके बाद जो बचे हुए चावल हैं उन्हें फेंक दीजिए और इस पानी के साथ में आपको इस मेडिसिन का सेवन करना है।
इसके अलावा अगर आप केवल शहद और घी के साथ इसको लेते है, ठंडे पानी के साथ लेते हैं, सादे पानी के साथ लेते हैं या फिर ऐसे ही ले लेते हैं कुछ ऊपर से नहीं पीते है तो भी आपको फायदा ही करेगा नुकसान नहीं करेगा।
पुष्यानुग चूर्ण की उपलब्धता (Pushyanug churna ki uplabdhata)
यह बहुत सारी अलग-अलग कंपनी की आती है और बहुत सारे लोकल फार्मा भी होता है जो इस कम्पोजीशन को बनाते हैं। यह आपको मार्किट में किसी भी आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाएगी।
पुष्यानुग चूर्ण के उपयोग और फायदे (Pushyanug Churna Ke Upyog aur Fayde)
इसका नाम पुष्यानुग इसलिए है, क्योंकि जो पुष्य नक्षत्र होता है, जो ज्योतिष विद्या के ज्ञाता है उन्हें पता होगा। बहुत सारे नक्षत्र होते हैं, उनमें से एक नक्षत्र होता है पुष्य नक्षत्र, तो इस औषधि का निर्माण करने का निर्देश है वो पुष्य नक्षत्र में दिया गया था। इस वजह से इसका नाम पुष्यानुग चूर्ण है। अगर आप इसके बारे में किसी से पूछेंगे तो 90% लोग आप को बोलेंगे कि यह फीमेल में मेंसुरेशन से रिलेटेड प्रॉब्लम में इसका प्रयोग करना चाहिए। जितनी भी औरतों की प्रॉब्लम होती है सफेद पानी का आना, पीरियड का ज्यादा हो जाना या फिर कम हो जाना, कमजोरी का होना उन सारे में इंसान तो लोग इस पुष्यानुग मेडिसिन का प्रयोग करते हैं।
यहां आपको इंटरेस्टिंग बात बताने वाला हूं। पुष्यानुग चूर्ण का जो निर्देश है जो आचार्य चरक ने दे रखा है, जो इसके इंडिकेशन होते है। वह उन सारे रोगों में जिसमें आपके शरीर के निचले मार्ग से किसी भी प्रकार का ज्यादा स्त्राव होता है उन सारी बीमारियों में यह फायदेमंद है। निचले भाग कौन से हैं पेशाब की रास्ता तथा आपकी माल मार्ग का रास्ता।
उसके बाद पुरुषों में होने वाले जो सीमेन के प्रॉब्लम होते हैं, जो सेक्सुअल डिसऑर्डर होते हैं। धात रोग का होना उनमें भी होता है और जो फीमेल के योनि के जो रोग होते हैं यानी कि फीमेल की यूट्रस में होने वाले रोग है, जिनमे ज्यादा सिक्युएशन होता है। उन सभी प्रकार की बीमारी में इन चारों बीमारियों में इसका प्रयोग करा जाता है।
अगर आपको मानलो पेशाब बहुत ज्यादा आती है कोई व्यक्ति जिसको यूरिन बार-बार हो रही है, लगातार होती है, हर दो-तीन घंटे में आपको यूरिन का प्रेशर आ जाता है। लेकिन आपको यूरिन में कोई इंफेक्शन नहीं है। आपने डॉक्टर से टेस्ट करवाए लेकिन यूरिन में कोई इंफेक्शन नहीं निकल रहा, लेकिन उसके बावजूद आप को ज्यादा मात्रा में यूरिन पास हो रही है तो आप इस मेडिसिन का प्रयोग कर सकते हैं।
इसके अलावा अगर आपको डायरिया हो जाए उसमें भी पुष्यानुग चूरन का उपयोग आसानी से किया जा सकता है।
अगर आपको पाइल्स की प्रॉब्लम है और पाइल्स में आपको ब्लीडिंग ज्यादा हो रही है। यह एक बात और कि पाइल्स से अलग ही बीमारी है। अगर आपको पाइल्स में ब्लीडिंग ज्यादा हो रही है। तब भी आप इस मेडिसिन का उपयोग कर सकते हैं। फीमेल को अगर हेवी ब्लीडिंग होती है, ड्यूरिंग मेंसुरेशन पीरियड के टाइम पर अगर आपको एक दिन में तीन से चार बार अपना पैड चेंज करना पड़ रहा है और आप की बिल्डिंग 3 दिन की बजाय 5 से 7 दिन तक हैवी फ्लोर बिल्डिंग रहती है, तो आप पुष्यानुग चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं।
इसके अलावा अगर आपको वेजाइनल डिसचार्ज होता है वेजाइनल डिसचार्ज में एक बात ध्यान रखिए जो बोटरी डिस्चार्ज होता है वो पानी की तरह बॉडी से डिस्चार्ज निकलता है, उसमें पुष्यानुग चूर्ण का प्रयोग किया जाता है। अगर आपको सामान्य डिस्चार्ज है, अगर आपको फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन हो गया है। ऐसी कंडीशन में पुष्यानुग चूर्ण उतना अच्छा काम नहीं करेगा।
अगर जेंट्स को जो प्रॉब्लम होती है, जल्दी डिस्चार्ज हो जाना, प्रीमेच्योर इजेकुलेशन का होना। इसके अलावा धात रोग होता है जिसके बारे में लोग गेनेरली बात करते जिसमे यूरिन से आपका जो सीमन होता है, वह आपके पेशाब के साथ में निकलने लगता है और कई बार बिना कोई इर्र्रेक्शन आये हुए, बिना कोई एक्साइटमेंट आए हुए फिर भी आपके पेनिस से किसी भी प्रकार का वाइट ली, मिल्की वाइट डिस्चार्ज होता रहता है। ऐसी कंडीशन में पुष्यानुग चूर्ण अच्छा काम करता है। इन सभी बीमारियों में जो मैंने आपको बताया, उसमे आप पुष्यानुग चूर्ण का प्रयोग कर सकते हैं।
सबसे अच्छी बात यह है इसमें सारी जो काष्ठ औषधियां है, काष्ठ औषधियां मतलब जो पेड़ पौधों से बनी हुई औषधियां रहती है जैसे की किसी के छाले, किसी के फूल है, किसी के बीच है इनका प्रयोग किया जाता है तो इसकी वजह से इसको लेने से कोई साइड इफेक्ट बॉडी में नहीं आता। आयुर्वेद मेडिसिन के भी साइड इफेक्ट होते हैं, इसलिए लिए जो काष्ठ औषधियां होती है, जो निरापद औषधियां होती जो काफी फेमस होती हैं, जिनका जनरली ज्यादातर वैद्य लोग प्रयोग करते हैं। उनका प्रयोग विदाउट डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से आप कर सकते हैं।



