क्यों गोंद के लड्डू सही नहीं बन पाते ? – डिलीवरी के बाद गोंद के लड्डू के फायदे और नुकसान।

Gond Ke Laddu

हम इस ब्लॉग पोस्ट में गोंद के लड्डू से सम्बंधित कुछ प्रमुख प्रश्नों की वजह जानेंगे। जैसे डिलीवरी के बाद क्यों पूरा इलाज डॉक्टर से लेने के बाद भी महिला पूरी तरह स्वस्थ नहीं रहती? गोंद के लड्डू बनाने में ये सावधानी बरतें, नहीं तो लड्डू ठीक से फायदा नहीं करेंगे। नए जन्मे बच्चे और माँ के पर्याप्त पोषण (Nutrition) के लिए गोंद के लड्डू में ये चीजें जरूर होना चाहिए।

पहली बात तो यह कि शहर ही नहीं बल्कि गांवों में भी, आज के समय में लोग डिलीवरी के बाद बनने वाले गोंद के लड्डू ठीक से नहीं बना पाते, जिससे माँ के साथ बच्चे को भी कमजोरी रहती है। और आगे चलकर बच्चा भी मजबूत नहीं हो पाता तथा उन दोनों को जरा से मौसम बदलने पर भी बीमारीयां आसानी से पकड़ लेती है। पुराने समय में लड्डू बनाने की सारी सामग्री आसानी से मिल जाती थी | अतः पुराने समय में स्त्रियां कई बच्चों की डिलीवरी के बाद भी बुढ़ापे तक पूरी तरह स्वस्थ बनी रहती थी। 

क्यों पूरा लाभ नहीं मिलता

डिलीवरी के बाद क्यों पूरा इलाज डॉक्टर से लेने के बाद भी महिला पूरी तरह स्वस्थ नहीं रहती, इसका सबसे बड़ा कारण है, प्राचीन मान्यताओं के प्रति सम्मान की कमी और आधुनिकता में जरूरत से ज्यादा खो जाना। 

आज कल महिलायें गोंद के लड्डू केवल रीतिरिवाज पूरा करने की तरह सेवन करती है। कहने का मतलब यह है, कि घर की बुजुर्ग महिलाओं जैसे माँ, सास, दादी, नानी आदि कहती है, कि बच्चे के जन्म के बाद गोंद के लड्डू खाये जाते है। तो नई बनी माँ भी एक-आधा किलो गोंद के लड्डू मार्किट से खरीदकर खा लेती है। इसका सबसे बड़ा कारण है अति आधुनिकता का दिमाग पर सवार होना। 

लेकिन इसका खामियाजा इन महिलाओं और उनके बच्चों को ही आगे जा कर भुगतना पड़ता है। क्योंकि जब नयी बनी माँ गोंद के पौष्टिक लड्डू खायेगी, तो वही पौष्टिकता दूध के जरिये बच्चे को भी प्राप्त होगी। इसलिए कम से कम 2 महीने तो गोंद के लड्डू का सेवन हर नई बनी माँ को करना चाहिए। तभी जच्चा और बच्चा को सम्पूर्ण पोषण प्राप्त होगा। 

इसका एक और कारण यह है, कि गोंद के लड्डू के फायदों की सही जानकारी न होना। इस वजह से भी कई महिलायें इन्हे अधिक महत्व नहीं देती। और जब महत्वपूर्ण ही नहीं समझेंगी, तो ठीक से सेवन भी नहीं करेंगी। लेकिन यह गोंद के लड्डू भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से अपने बहुमूल्य फायदों के चलते, आज तक अपना स्थान बनाये हुए है। क्योंकि इनके बराबर फायदेमंद दूसरी कोई अन्य दवा या टॉनिक मार्किट में उपलब्ध ही नहीं है या ये कहें कि कोई कंपनी बना नहीं पाई।

प्रमुख कारण

आज के समय में गोंद के लड्डू ठीक से नहीं बन पाने के प्रमुख कई कारण है:

  1. सामग्री का पता न होना:

लोगो को पूरी चीजों (जैसे – आवश्यक जड़ी बूटीयों) का पता ही नहीं होता, जो डिलीवरी के बाद नई माँ के लिए बनने वाले गोंद के लड्डुओं में डाली जाती है।

  1. सामग्री न मिल पाना:

गोंद के लड्डु की पूरी सामग्री अगर किसी को पता भी हो, तो आसानी से दुकानों पर नहीं मिलती। इसलिए अधिकतर लोग केवल मेवा, सोंठ, गोंद आदि डालकर ही लड्डू बना देते है। जो ठीक से फायदा नहीं करते ।

  1. उचित मात्रा में मिलाना:

जब सारी सामग्री जड़ी बूटीयों सहित उचित मात्रा या अनुपात में लड्डुओं में डाली जाती है, तब ही पूरा लाभ होता है।

अतः जब पर्याप्त मात्रा में सभी सामग्री से बने गोंद के लड्डुओं का माँ सेवन करती है। तो माँ के साथ बच्चे को भी फायदा होता है, क्योंकि ये सभी जड़ी-बूटियां, मेवे आदि माँ के दूध के जरिये बच्चे को भी मिलते है। जो बच्चे को कई बीमारियों से बचाता है और उसे भी स्वस्थ्य बनाता है।

ये तो हुई जानकरी अब थोड़ी मार्केटिंग की बात:
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लेखक
S K Gautam
आयुर्वेद एवं योग आचार्य
26 वर्षों का अनुभव
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