चंद्रप्रभा वटी मार्केट में चंद्रप्रभा टेबलेट (chandraprabha tablet), चंद्रप्रभा गुटिका (Chandraprabha Gutika) और चंद्रप्रभा गुलिका (chandraprabha gulika) आदि नामों से दुकानों पर मिलती है। मलयालम (malayalam) भाषा के लोग इसे चंद्रप्रभा गुलिका नाम से पुकारते है। मुख्य तौर पर चंद्रप्रभा वटी मूत्र से जुड़ी संबंधित समस्याओं की अचूक औषधि है। समस्याएं जैसे बार-बार पेशाब आने के लिए यह दवा बहुत लाभकारी है। इसके उपयोग से पेशाब से संबंधित लगभग सभी समस्याएं दूर की जा सकती हैं।

चंद्रप्रभा वटी कौन-कौन सी बीमारी में काम आती है ? – Chandraprabha Vati Uses and Benefits
ऐसे पुरुष जो प्रमुख तौर पर मूत्र व संस्थान से सम्बंधित किसी समस्या के चलते या फिर किसी प्रकार के प्रमेह दोष के चलते बहुत अधिक कमजोर हो गए हैं, जिनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता क्षीण पड़ गई है जो थोड़ा सा काम करते ही बहुत जल्दी थक जाते हैं, मेहनत नहीं कर पाते, शरीर में आलस्य बना रहता है। ऐसी अवस्था में लीवर को ताकत देने वाली किसी औषधि के साथ यकृत को बल प्रदान करने वाली किसी औषधि के साथ यदि चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग करवाया जाए तो बहुत ही शीघ्र कमजोरी दूर होती है। साथ ही साथ वह रोग भी दूर होता है जिसके कारण वह कमजोरी उत्पन्न हुई है। ऐसी अवस्था में मैं पुनर्नवारिष्ट के साथ चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग करवाना अधिक पसंद करूँगा। हालांकि अन्य और भी बहुत से विकल्प रोगी के अवस्था के ऊपर रोगी की स्थिति को देखते हुए प्रयोग किए जा सकते हैं।
ऐसी महिलाएं जिनका बार-बार गर्भपात या फिर गर्भाधान या जल्दी-जल्दी गर्भाधान इसके अलावा अति मैथुन या अति प्रसव के चलते गर्भास्य दुर्बल हो गया है। वह खुद बहुत ज्यादा कमजोर हो गई है या फिर बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिनको पेशाब के रास्ते में किसी प्रकार का इन्फेक्शन बना रहता है जिसकी वजह से पेशाब में जलन बनी रहती है, दर्द होता रहता है, थोड़ा-थोड़ा करके पेशाब बार-बार आता रहता है या फिर बहुत ही श्वेत प्रदर से पीड़ित महिलाएं जिसके कारण उन्हें शारीरिक तौर पर बहुत अधिक कमजोरी उत्पन्न हो जाती है। हमेशा हाथ पैरों में दर्द बना रहता है, किसी कार्य में उनका मन नहीं लगता, चेहरा निस्तेज पड़ गया है तो ऐसी अवस्था में सुपारी पाक और अशोकारिष्ट के साथ चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग निश्चित तौर पर लाभ प्रदान करने वाला रहता है। इसके प्रयोग से गर्भाशय को बल प्राप्त होता है। महिलाओं की शिथिलता दूर होती है, उनके गर्भाधान की क्षमता में वृद्धि करती है और अगर पेशाब के रास्ते में इंफेक्शन की समस्या अधिक है तो गोखरू काढ़ा के साथ चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग अधिक लाभ प्रदान करने वाला रहता है। हालांकि यहां पर ध्यान रखें पेशाब की मात्रा को निश्चित तौर पर यह बढ़ा देते है।
वही मूत्र व संस्थान से संबंधित हर समस्या में चंद्रप्रभा वटी कुछ-कुछ रामबाण औषधि के समान कार्य करती है। पेशाब में जलन की समस्या हो, पेशाब रुक रुक कर आता हो, पेशाब बंद हो गया हो या फिर पेशाब करते समय दर्द की अनुभूति होती हो। इन सबके अलावा पेशाब का थोड़ा-थोड़ा बार बार आना या फिर पेशाब का बहुत ज्यादा जल्दी – जल्दी आना केवल इतना ही नहीं पेशाब करने के पश्चात बहुत से लोगों को ऐसी अनुभूति होती है कि अभी कुछ मात्रा में पेशाब, पेशाब की थैली में रुका हुआ है। ऐसी सभी अवस्थाओं में चंद्रप्रभा वटी बहुत ही शीघ्र लाभ प्रदान करती है। साथ ही साथ संपूर्ण मूत्र व संस्थान को बल प्रदान करने के अपने गुण के चलते यह औषधि किडनी अर्थात हमारे वृक्कों को भी बल प्रदान करती है। उनसे संबंधित बहुत ही समस्याओं को बहुत ही प्रभावी तरीके से दूर कर देती है।
पेशाब के साथ प्रोटीन का आना या खून का आना या फिर शुगर का आना किडनी में किसी प्रकार की सूजन का हो जाना, यूरिक एसिड का बढ़ जाना या फिर यूरिया का बढ़ जाना जैसी समस्याओं में चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग अन्य आवश्यक औषधियों के साथ करवाने पर बहुत ही शीघ्र लाभ की प्राप्ति करवाई जा सकती है और अपने इसी गुण के चलते जोड़ों के दर्द या फिर गठिया जैसी समस्या में भी इसके प्रयोग से लाभ की प्राप्ति होती है।
रक्त में मौजूद अशुद्धियों को दूर करने के एक प्रकार से अपने अप्रत्यक्ष गुण के चलते चंद्रप्रभा वटी हमारी बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने का भी कार्य भी करती है। हमारी किडनी को हमारी वृक्कों को यह बल प्रदान करती है। उन्हें खुद से इतना सफल बनाती है कि भविष्य में इस प्रकार की समस्याएं उनमें ना उत्पन्न हो। यहां में अनावश्यक अनुपान किन-किन की आवश्यकता होती है उनके विषय में केवल इसलिए नहीं बता रहा हूं क्योंकि यह थोड़ा सा सीरियस थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड मामला हो जाता है। ऐसी कठिन और जटिल अवस्था में आपको चिकित्सक के मार्ग निर्देशन की अत्यधिक आवश्यकता होती है। खुद से किया गया इलाज बहुत अधिक हानिकारक हो सकता है क्योंकि यह समस्या कई बार काफी जटिल और कठिन हो जाती है अगर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए तो।
पथरी के लिए
इसके अलावा चंद्रप्रभा वटी के प्रयोग से पथरी की अवस्था में लाभ की प्राप्ति होती है। यहां एक बात अच्छे से समझ लेने की है की चंद्रप्रभा वटी के प्रयोग से पहले से मौजूद पथरी दूर नहीं होती है बल्कि इसके प्रयोग से आगे भविष्य में पथरी नहीं बनती है। जो पथरी बनी हुई है, उसकी वृद्धि नहीं होती। हालांकि किसी ऐसी अन्य औषधि के साथ इसका प्रयोग यदि करवाया जाए जो पथरी को तोड़ने का काम करती है तो इन दोनों के सहयोग से बहुत ही शीघ्र पथरी की समस्या को जड़ से समाप्त की जा सकता है। ऐसी अवस्था में तृणपंचमूल क्वाथ के साथ इसका प्रयोग बहुत अधिक लाभदायक रहता है परंतु ऋण पंचमूल क्वाथ आमजन के लिए संभव नहीं हो पाता तो ऐसी अवस्था में मेरी एक बहुत ही प्रिय औषधि है एमिल फार्मा की नीरी सिरप उसके साथ में इसका प्रयोग कराने से बहुत ही शीघ्र और बहुत ही अच्छे लाभ की प्राप्ति होती है।
मधुमेह के लिए
मधुमेह की अवस्था में चंद्रप्रभा वटी बहुत ही लाभदायक परिणाम दिखाने वाली औषधि है, ना केवल मूत्र के साथ आ रही शुगर को नियंत्रित करती है बल्कि चंद्रप्रभा वटी के प्रयोग से उसमें मौजूद शिलाजीत के चलते शरीर को ताकत मिलती है। जिसके परिणाम स्वरूप खुद से रक्त में शर्करा के स्तर को यह नियंत्रित रख पाए।
कुछ हद तक हालांकि पूर्ण रूप से नहीं, परंतु बसंत कुसुमाकर रास के समान यह लाभदायक है। अब यहां पर एक चीज और थोड़ा ध्यान से देखिए कम उम्र में अति वीर्य स्त्राव के चलते जब जननांगों में तनाव की कमी उत्पन्न हो जाती है और बार-बार शुक्र स्त्राव स्वतः ही होना प्रारंभ हो जाता है। चाहे वह स्वप्न की अवस्था में अज्ञानता वश हुआ हो या फिर मूत्र के साथ मिश्रित होकर या उसके पहले या बाद में आता हो तो ऐसी अवस्था में शरीर में कमजोरी तो आती है साथ ही साथ कर्मेंद्रियां भी शिथिल होती जाती है। कई बार तो स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो जाती है कि केवल चिंतन मात्र या फिर देखने मात्र से ही वीर्य स्त्राव हो जाता है। ऐसी स्तिथि में चंद्रप्रभा वटी का प्रयोग बंग भस्म के साथ ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए करा जाये तो बहुत अधिक अच्छे लाभ की प्राप्ति बहुत ही जल्दी देखने को मिलती है।
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चंद्रप्रभा वटी कितने दिन तक ले सकते हैं? – Chandraprabha Vati Ke Upyog Kitne Din
आप जानना चाहते है, कि चंद्रप्रभा वटी कितने दिन खाना चाहिए। तो इसको आप 3 महीने से लेकर 6 महीने तक इसका सेवन कर सकते है। कुछ केस में केवल 1 या 2 महीने में ही पूर्ण लाभ मिल जाता है। यद्यपि सेवन के विषय में चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए। क्योंकि हर व्यक्ति का स्वास्थ्य का स्तर अलग होता है और हर बीमारी अलग होती है।
चंद्रप्रभा वटी के नुकसान और सावधानियां बताएं – Chandraprabha Vati Side Effects
वही बात करें सावधानियों की तो मैंने आपको आर्टिकल के प्रारंभ में बताया था कि इसके अंदर लोहा भस्म का अधिक मात्रा में प्रयोग किया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप किसी के पेट में अल्सर, थैलेसीमिया, या फिर आंतों में सूजन, या फिर खून में आयरन की मात्रा बहुत अधिक बढ़ गई है या फिर कोई ऐसी स्थिति जिसके अंदर आयरन सप्लीमेंट वगैरह प्रयोग करने की मना हो वहां इसका प्रयोग हानिकारक हो सकता है। साथ ही साथ मैं व्यक्तिगत तौर पर लिवर की कमजोरी की अवस्था में इसका प्रयोग करवाना नहीं पसंद करता हूं। वही बच्चों और गर्भवती स्त्रियों को अगर इसका प्रयोग करवाने की आवश्यकता हो तो चिकित्सक के निर्देश के अनुसार ही आगे बढ़ना लाभदायक रहेगा। हालांकि लगभग निरापद सी औषधि है केवल इन सावधानियों को ध्यान में रखा जाए।
अब बात की जाए मात्रा की तो लगभग एक या दो गोली की मात्रा अथार्त 250mg से 500mg की मात्रा दिन में। दो से तीन बार तक इसका प्रयोग आवश्यक अनुपान के साथ करवाने पर लाभ की प्राप्ति होती है।
अब सबसे अंत में चंद्रप्रभा वटी के विषय में मैं दो बातें लिखना चाहूंगा मूत्र व संस्थान से संबंधित हर प्रकार की समस्या में चंद्रप्रभा वटी बहुत ही लाभदायक औषधि है। वहीं महिलाओं और पुरुषों के जननांगों को बल प्रदान करने के उद्देश्य से भी काफी लाभदायक औषधीय अपने लगातार प्रयोग से सप्त धातुओं में वृद्धि करती है और रसायन गुण यह प्रदान करती है।
चंद्रप्रभा वटी की कीमत – Chandraprabha Vati Price
मार्किट में कई ब्रांड की इस दवा को बनाते है। इसको लेकर लोग सामन्यतः एक प्रश्न पूछते है कि सबसे अच्छी चंद्रप्रभा वटी कौन सी कंपनी की है? तो हम आपको बता दे सभी ब्रांड अच्छा उत्पाद ही बनाते है, अंतर है तो बस उनकी मात्रा और मूल्य का।
- AVN Chandraprabha DS Tablets – यह 10 Tablets और 120 Nos की पैकिंग में दुकानों पर उपलब्ध है।
- Baidyanath Chandraprabha Bati 80 Tablets की पैकिंग में उपलब्ध है। बैद्यनाथ चंद्रप्रभा वटी शिलाजीत युक्त करके निर्माण की जाती है।
- डाबर चंद्रप्रभा वटी (Dabur Chandraprabha Vati) भी 80 टैबलेट की पैकिंग में मार्किट में आप पर्पट कर सकते है।
- पतंजलि चंद्रप्रभा वटी को Patanjali Divya Chandraprabha Vati के नाम से इस दवा को बनता है। जो 40 टैबलेट की पैकिंग में आप खरीद सकते है
- झंडू चंद्रप्रभा वटी (Zandu Chandraprabha Vati) भी 40 टैबलेट की पैकिंग में आप खरीद सकते है
- धूतपापेश्वर चंद्रप्रभा गुटिका (Dhootapapeshwar Chandraprabha Gutika) 30 और 100 टैबलेट का पैक उपलब्ध कराती है।
- सांडू चंद्रप्रभा गुटिका (Sandu Chandra prabha Gutika) भी 40 टैबलेट की पैकिंग में आप खरीद सकते है
- इसके अलावा आप Himalaya, Dindayal, Vyas आदि कंपनी की भी यह दवा खरीद सकते है
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लेखक S K Gautam आयुर्वेद एवं योग आचार्य View Profile |




