चंदनादि वटी के फायदे और उपयोग (Chandanadi Vati Uses and Benefits in Hindi)

चंदन को आयुर्वेद में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। शीतल एवं मूत्रल होने के कारण, इस वटी का उपयोग सभी तरह की मूत्र से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है। चंदन का इस्तेमाल कई शास्त्रोक्त औषधियों में प्राचीन समय से ही किया जाता रहा है। चंदनादि वटी भी इसी तरह की आयुर्वेदिक औषधि है। यह औषधि लगभग हर प्रकार के मूत्र रोगों में लाभदायक है। आइये इसके बारें में और अधिक विस्तार से जानते हैं :-

Chandanadi Vati Uses in Hindi

चंदनादि वटी क्या है – What are Chandanadi Vati Tablets

चन्दनादि वटी एक बहुहर्बल आयुर्वेदिक दवा है। यह पेशाब के दौरान जलन, मूत्रकृच्छ, शूज और इनसे संबंधित सभी परेशानियों के उपचार के लिए अच्छी औषधि है। सफेद चंदन, सफेद राल, कबाब चीनी जैसे घटकों से बनी यह दवा बेहद लाभकारी है। इनका उपयोग सभी तरह के मूत्र विकारों को ठीक करने में किया जाता है। शरीर में ज्यादा गर्मी या दूसरी बजहो से पेशाब में जलन होना, मूत्र मार्ग में मवाद पड़ जाना, सुजाक जैसे विकार में इसका सेवन बेहद लाभदायक होता है। इसका सेवन चिकित्सक की राय से करने पर इन सभी बिमारियों में बहुत जल्दी छुटकारा मिलता है।

चंदनादि वटी के घटक – Chandanadi Vati Ingredients

चंदनादि वटी के प्रमुख घटक (Chandanadi vati ke ghatak ) में

  • सफ़ेद राल
  • आमला
  • कबाबचीनी
  • श्वेत चंदन का बुरादा
  • गंध बिरोजा का सत्व
  • कत्था
  • छोटी इलायची के बीज

चंदनदी वटी में उपयोग होने वाले चन्दन के फायदे की बात करें तो, इसमें उपयोग होने वाला श्वेता चंदना यह एक प्रकार का चंदन ही होता है और इसे संतालम एल्बम नाम से भी जाना जाता है। यह पित्त में जलन, जठरशोथ, और गले में खराश आदि के उपचार में सहायक है। क्योंकि यह शीतलक का काम करता है। त्वचा से जुड़े रोगों जैसे कि फुंसी, खाज, खुजली, आदि के उपचार में उपयोग किया जाता है और साथ ही यह त्वचा की रंगत में भी निखार लाता है। एवं मूत्रमार्गशोथ और योनिशोथ के अलावा यह मूत्राशय की सूजन के इलाज में मूत्रवर्धक के रूप में लाभकारी है।

चंदनादि वटी को बनाने की विधि – Chandanadi Vati Ko Banane Ki Vidhi

इसके बनाने की विधि (Preparation process) इस प्रकार है, कि इसको बनाने के लिए सभी तरह की चूर्ण बनाने योग्य जड़ी बूटियों का पहले बारीक चूर्ण बनाकर रख लें। फिर इसमें अच्छा चंदन तेल और रसोत मिलाकर गोलियां बनाकर तैयार कर लें।

इस दवा को बनाने के लिए बतायी गयी सभी सामग्री जैसे श्वेत चंदन, कबाब चीनी, इला बीज, गंध बिरोजा सत्व, सफेद राल, खदिरा, अमला यह सब चार-चार तोला की मात्रा में ले लें। इसके अलावा कपूर 1 तोला और गेरू 2 तोला लेकर किसी बर्तन में डालकर अच्छी तरह कूटकर बारीक चूर्ण बनाकर तैयार कर लें। फिर 1 तोला अच्छा चंदन तेल और 4 तोला रसोत के साथ मिलाएं। रसोत को शुद्ध करके प्रयोग में लें। तथा इन्हें 3-3 रत्ती आकार की गोलियों में लपेटें।

चन्दनादि वटी के फायदे – Chandanadi Vati Benefits in Hindi

चंदन की विशेषताओं से भरपूर यह दवा सभी तरह के मूत्र विकारों में बहुत लाभकारी है | सुजाक या मूत्रकृच्छ की समस्या उत्पन्न होने पर पेशाब में भयंकर जलन तथा वेदना होती है | ऐसी स्तिथि में चंदनादि वटी का इस्तेमाल करने से बेहद लाभ होता है इसके और भी अनेक फायदे (Chandanadi vati ke fayde) है। यह शीत वीर्य तथा मूत्रल खूबियों वाली दवा है। इसको लेने से मूत्र रोगों का नाश होता है।

सुजाक रोग में फायदे:- यह बीमारी होते ही मरीज को मूत्रनली के मुंह पर खुजली होना, जलन होना आदि समस्या होने लगती है। पेशाब गर्म व लाल होती है तथा पेशाब करते समय बहुत ज्यादा जलन होती है। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है, वैसे-वैसे ये बीमारी दर्दनाक होती जाती तथा मवाद पड़ जाता है, अंडकोष में दर्द होता है आदि समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसी स्तिथि में चंदनादि वटी का सेवन करने से जल्दी फायदा पहुँचने लगता है। इसका असर सीधा मूत्र नली पर होता है और जल्द ही मूत्र रोगों से छुटकारा मिलता है।

मूत्रकृच्छ रोग में उपयोग:- चंदनादि वटी शीत वीर्य, मूत्रल एवं व्रणरोपक होने की बजह से मूत्रकृच्छ बीमारी में बेहद लाभकारी है। इसका इस्तेमाल करने पर पेशाब खुल कर और साफ आने लगता है।

चंदनादि वटी के नुकसान – Chandanadi Vati Ke Side Effects

यह औषधि पुर्णतः यह वटी बिलकुल सुरक्षित है, इसके कोई बुरे प्रभाव नहीं है। लेकिन सदैव चिकित्सक या वैद्य की सलाह के अनुसार ही इस वटी का सेवन करना चाहिए। क्योंकि डॉक्टर या वैद्य मरीज के सम्पूर्ण शरीर का परीक्षण करके तथा उसकी अन्य बिमारियों को ध्यान में रख कर ही दवा और उसका डोज रोगी को बताता है। मनमाने तरीके से किसी भी दवा का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है।

चंदनादि वटी की सेवन विधि – Chandanadi Vati Ki Sevan Vidhi

चंदनादी वटी की मात्रा (chandanadi vati dosage) की बात करें, तो खाना खाने से पहले 2 से 4 गोलियाँ ठंडे पानी, लस्सी, चंदन का शर्बत, अथवा खस शर्बत के साथ दिन में करीबन 3-4 बार या चिकित्सक के राय अनुसार सेवन करें।

चंदनादि वटी की कीमत – Chandanadi Vati Price

मार्किट में कई ब्रांड की चंदनादी वटी उपलब्ध है इसमें से प्रमुख इस प्रकार है :-

चन्दनादि वटी बैद्यनाथ (Baidyanath Chandanadi Vati) के (40टैबलेट) के 3 का पैक लगभग 425 रुपये मूल्य में amazon पर मिल जायेगा।

पतंजलि चन्दनादि वटी (Patanjali Chandanadi Bati) की बात करे तो, पतंजलि इसे दिव्या चंद्रप्रभा वटी (Divya Chandraprabha Vati) के नाम से बनाता है और 40 टैबलेट के पैकेट को 43 रूपये में बेचता है।

प्लेनेट आयुर्वेद चन्दनादि वटी (Planet Ayurveda Chandanadi Vati) के एक पैक (Bottle) में 120 टैबलेट आती है। और हर टैबलेट 500 mg की होती है। तथा यह मार्किट में लगभग 415 रूपये में उपलब्ध है।

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