योग भगाये रोग, ये पुरानी कहावत तो हम सब जानते हैं। योग शब्द का निर्माण संस्कृत की “युज” धातु से हुआ है, जिसका अर्थ होता है – मिलाना अथवा जोड़ना। योग का मूल उद्देश्य मनुष्य को उसकी आत्मा से जोड़ना तथा जीवन में संतुलन स्थापित करना है। दरसल योग का सच्चा सार ही हमारी जीवन शक्ति को ऊपर उठाने के आसपास घूमता है। योग का मुख्य उद्देश्य ही हमारे शरीर को स्वस्थ रखना है। योग का अंतिम लक्ष्य व्यक्ति को स्वयं से ऊंचा उठाकर ज्ञानोदय की उच्चतम अवस्था प्राप्त करने में मदद करना है। जैसा कि भगवद् गीता में भी कहा गया है कि व्यक्ति स्वयं से संयोग करके मनुष्य को पूरी तरह से अनुशासित कर सभी इच्छाओं से स्वतंत्र होकर जब केवल स्वयं में लीन हो जाता है, तभी उसे योगी माना जाता है।

आप जानते हैं योग का क्या है महत्व
योग का कोई धर्म नहीं है, यह जीने की एक कला है, जिसका लक्ष्य है स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का विकास करना। मनुष्य का अस्तित्व शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक है और योग इन तीनों के संतुलित विकास में मदद करता है। शारीरिक व्यायाम के अन्य रूप जैसे एरोबिक्स केवल शारीरिक तंदुरुस्ती को ही सुनिश्चित करते हैं। उनमें आध्यात्मिक या सूक्ष्म शरीर के विकास के लिए कुछ नहीं है। लेकिन यौगिक अभ्यास शरीर में दोबारा से ब्रह्मांडीय ऊर्जा भर देता है जिससे शरीर में सही संतुलन और सद्भाव बनता है, स्वचिकित्सा प्रोत्साहित करता है योग, शरीर से विषाक्त पदार्थ और मन से नकारात्मक विचार को बाहर निकलता है योग, व्यक्तिगत शक्ति में वृद्धि करता है, आत्मबोध में सुधार करता है, सजगता ध्यान और एकाग्रता में मदद करता है जो की बच्चों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। योग हमारे तनाव को कम करता है, योग करने वाले सदैव स्वयं को उत्साहित महसूस करते हैं। इस प्रकार योग प्रत्येक साधक को शरीर और मन को नियंत्रित करने के लिए शक्ति प्रदान करता है।
अब जानते हैं आप की योग करने से क्या लाभ होता है
मित्रों योग की अभ्यास की कला व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद करती है। ये भौतिक और मानसिक संतुलन करके शांत शरीर और मन प्राप्त करवाता है। तनाव और चिंता का प्रबंधन करके आपको राहत देता है। ये शरीर में लचीलापन मांसपेशियों को मज़बूत करने और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में भी मदद करता है। ये स्वसन, ऊर्जा और जीवन शक्ति में सुधार लाता है।
योग का अभ्यास करने से ऐसा लगता है जैसे ये मात्र शरीर को खींचने या तानने तक ही सीमित नहीं है लेकिन आप जैसा देखते हैं महसूस और गतिविधि करते हैं उससे कहीं अधिक ये आपके शरीर को सक्षम बनाता है। योगासन हम में शक्ति, लचीलापन और आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं। योग का नियमित अभ्यास करने से वज़न में कमी, तनाव से राहत, प्रतिरक्षा में सुधार और एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने में मदद मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
जन-जन तक योग को पहुंचाने के लिए योग ऋषि स्वामी रामदेव जी के अविश्वसनीय योगदान को कौन नहीं जानता है। आज विश्व भर में घर घर में योग की पहुंच बढ़ाने और भारत की इस प्राचीन परंपरा को पहुंचाने का ही परिणाम है, कि लोग योग के प्रति जागरूक हुए और परिणाम निकला की 2014 में हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र को 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया और समूचे विश्व ने तहे दिल से इसका स्वागत किया और अब हर वर्ष बड़े ही उत्साह के साथ विश्व भर में योग दिवस मनाया जा रहा है।
आज विश्व के सभी देशों में योग के महत्व और उसकी शक्ति को स्वीकार किया जा चुका है। यह हमारे लिए बहुत गर्व की बात है, कि हमारी इस अति प्राचीन परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है उसे लोग अपना रहे है।
योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है, ये पांच हज़ार साल पुरानी परंपरा है. ये मन और शरीर की एकता, विचार और कार्य, संयम और पूर्ति, मनुष्य और प्रकृति के बीच सद्भाव, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण है। ये सिर्फ व्यायाम के बारे में नहीं है, बल्कि अपने आप, दुनिया और प्रकृति के साथ एक होना है। चलिए स्वयं करें योग, अपनों को करवाए योग क्योंकि स्वस्थ रहेंगे हम, तभी तो स्वस्थ रहेगा भारत।